वीणा योग

 ज्योतिष में कुछ योग ऐसे होते हैं जो जीवन को संघर्ष की भाषा में नहीं पढ़ते बल्कि वे जीवन को संतुलन की दृष्टि से देखते हैं।।वीणा योग ऐसा ही एक नाभास योग है।।यह योग जीवन में उछाल नहीं लाता बल्कि यह जीवन को सँवारता है जैसे वीणा के अनेक तार एक साथ बजकर राग रचते हैं वैसे ही यह योग ग्रहों के संतुलित विस्तार से जीवन की तान बनाता है।।यह योग बताता है कि जीवन केवल तीव्र प्रयास से नहीं चलता जीवन सही लय में चलने से सधता है।।

वीणा योग का निर्माण तब होता है जब कुंडली के सात दृश्य ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि केवल सात भावों में स्थित हों इसमें पाँच भाव रिक्त रहते हैं।।यह रिक्तता अभाव नहीं होती यह संतुलन की जगह होती है।।
राहु और केतु की गणना इसमें नहीं की जाती क्योंकि वे सदैव एक-दूसरे से सप्तम स्थिति में रहते हैं और नाभास योगों के मूल सिद्धांत में सम्मिलित नहीं होते।।
इस योग में ग्रह न तो एक स्थान पर अत्यधिक जमा होते हैं न ही पूरी तरह बिखर जाते हैं।।इसी कारण इस योग से युक्त व्यक्ति का जीवन अत्यधिक उग्र या अत्यधिक निष्क्रिय नहीं होता अपितु वह मध्य मार्ग पर चलता है जहाँ न तो सब कुछ छोड़ने की जल्दबाज़ी होती है और न ही सब कुछ पकड़ लेने की इच्छा होती है।।उसके भीतर बहुआयामी क्षमता होती है।।वह जीवन के कई क्षेत्रों को एक साथ साध सकता है बिना स्वयं को तोड़े क्योंकि वह कठोर होकर नहीं चलता अपितु वह सौम्यता और विवेक से आगे बढ़ता है।।कला, सौंदर्य, भाषा और अभिव्यक्ति
उसके जीवन में स्वाभाविक रूप से उपस्थित रहती है।यह योग व्यक्ति को चरम से बचाता है न तो अत्यधिक वैराग्य
और न ही अंधी भौतिक दौड़।।वीणा योग के प्रभाव में जीवन अक्सर संतुलित दिखाई देता है।।निर्णय जल्दबाज़ी में नहीं लिए जाते बल्कि समय को समझकर कदम उठाए जाते हैं।।ऐसे व्यक्ति का कला, संगीत, साहित्य, शिक्षा या संवाद से जुड़ाव हो सकता है।।
समाज में उसकी छवि आक्रामक नहीं होती बल्कि वह सौम्य और विश्वसनीय मानी जाती है।।ह एक साथ कई भूमिकाएँ निभा सकता है और वह भी बिना किसी एक को पूरी तरह छोड़े।।जब वीणा योग के ग्रह बलवान होते हैं
या शुभ भावों में स्थित होते हैं तो इसका सौंदर्य स्पष्ट दिखाई देता है।।ऐसा व्यक्ति लेखक, कलाकार, संगीतज्ञ, शिक्षक या विचारक हो सकता है।।कूटनीति, परामर्श, प्रशासन या नेतृत्व में वह संतुलन के कारण आगे बढ़ता है।।वह टकराव नहीं बढ़ाता बल्कि वह समाधान की भाषा समझता है।।यदि ग्रह निर्बल हों या पीड़ित हों तो वीणा योग का स्वर थोड़ा असंतुलित हो सकता है।।व्यक्ति एक साथ कई दिशाओं में प्रयास कर सकता है जिससे एकाग्रता टूट सकती है जिसके कारण अवसर आधे हाथ में आकर छूट सकते हैं फिर भी यह योग जीवन को पूरी तरह बिखरने नहीं देता।।यह भीतर एक सीमा बनाए रखता है जिससे व्यक्ति स्वयं से पूरी तरह दूर नहीं जाता।।
वीणा योग वाला व्यक्ति कठोर नहीं होता पर कमजोर भी नहीं होता।।वह अत्यधिक महत्वाकांक्षी नहीं होता पर आगे बढ़ना जानता है।।वह प्रदर्शन से अधिक गुणवत्ता में विश्वास करता है।।उसका जीवनएक दिखावटी प्रस्तुति नहीं होता है।।
वीणा योग का पूर्ण प्रभाव दशा और अंतरदशा में प्रकट होता है।।विशेषकर तब जब शुभ ग्रह सक्रिय हों लग्न और चंद्र बल में हों और कला शिक्षा या संवाद से जुड़े ग्रह जाग्रत हों।।वीणा योग जीवन में चमत्कार नहीं करता अपितु यह जीवन को सँभालता है।।यह योग न व्यक्ति को अचानक ऊँचाई पर उठाकर गिराता है और न ही उसे गहराई में डुबोता है।।यह उसे ऐसी ऊँचाई पर स्थिर रखता है जहाँ दृष्टि साफ रहती है और पाँव जमीन पर होते हैं।।
जहाँ अन्य योग जीवन को धक्का देते हैं वीणा योग जीवन को मधुर संगीत देता है।।
जितना जान पाया उतना लिखने का प्रयास किया शेष सब भगवान शिव के अधीन है क्योंकि कर्ता भी वही हैं और कारण भी वही हैं।।

Comments

Popular posts from this blog

अज्ञात भय

वैदिक ज्योतिष और नवम भाव