Posts

Showing posts from April, 2026

मांगलिक दोष – अभिशाप या शक्ति?

मांगलिक दोष – अभिशाप या शक्ति? समाज ने “मांगलिक” शब्द को डर से जोड़ दिया है। कहा जाता है कि मांगलिक व्यक्ति से शादी करने पर जीवनसाथी को खतरा होता है। पर ज्योतिष का गहरा सच इससे अलग है। मांगलिक होना कोई बीमारी नहीं, बल्कि मंगल ग्रह की तीव्र ऊर्जा का शरीर और मन में उतर आना है। मंगल अग्नि है। वही अग्नि जो लोहे को पिघलाती भी है और तलवार भी बनाती है। मांगलिक व्यक्ति के भीतर यही अग्नि ज्यादा होती है। इसलिए वे सामान्य लोगों से ज्यादा तेज, साहसी, भावुक और क्रियाशील होते हैं। वे जल्दी प्रतिक्रिया करते हैं, जल्दी गुस्सा भी होते हैं और जल्दी प्रेम भी करते हैं। यही कारण है कि उनके रिश्तों में तीव्रता अधिक होती है – चाहे वह लड़ाई हो या आकर्षण। यह समझना बहुत जरूरी है कि “मांगलिक से मांगलिक की शादी” कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि ऊर्जा-संतुलन का सिद्धांत है। अगर एक व्यक्ति में मंगल की ऊर्जा बहुत ज्यादा है और दूसरा बहुत शांत, तो टकराव तय है। मानसिक, शारीरिक और यहां तक कि दांपत्य जीवन में भी असंतुलन बनता है। पर जब दो लोगों की मंगल-ऊर्जा बराबर होती है, तो वही तीव्रता आपसी समझ, आकर्षण और मजबूत रिश्ते में बदल ...

मानसिक तनाव,अवसाद आदि के मूल में चंद्र व बुध

आजकल ज्योतिषीय समाधान के लिए मिलने वाले अधिकतर लोगों का प्रश्न मानसिक तनाव,अवसाद, एंजाइटी इत्यादि को लेकर होता हैं। प्रत्यक्ष रूप से कई लोगों का प्रश्न शिक्षा, कैरियर, पारिवारिक क्लेश आदि आदि प्रश्नों के रूप में सामने आता है, अधिकतर लोगों इन प्रश्नों के मूल में भी मानसिक तनाव,अवसाद, एंजाइटी आदि ही निहित होता है, तो आज इन्हीं प्रश्नों का ज्योतिषीय आंकलन करते है..... मानसिक तनाव हमेशा बाहर की परिस्थितियों से नहीं आता अपितु इसका सीधा संबंध हमारे भीतर के मन और विचारों से होता है।।ज्योतिष में मन का संबंध चंद्र से और सोच विचार का संबंध बुध से माना जाता है।।जब ये दोनों संतुलित रहते हैं तो व्यक्ति शांत और स्पष्ट रहता है लेकिन जब इनमें असंतुलन होता है तो तनाव बढ़ने लगता है।। चंद्र मन का प्रतिनिधित्व करता है।।यह हमारी भावनाओं संवेदनशीलता और यादों से जुड़ा होता है।।यदि चंद्र कमजोर हो जाए तो व्यक्ति छोटी छोटी बातों को भी दिल से लगाने लगता है।।वह जल्दी दुखी होता है पुरानी बातों को पुनः पुनः याद करता है और भीतर एक हल्की बेचैनी बनी रहती है जिसके कारण यही धीरे धीरे मानसिक तनाव बन जाती है।। बुध विचारों...

केतु भाग 2

ज्योतिष शास्त्र में केतु को प्रायः केवल विच्छेद औरवैराग्य का ग्रह मान लिया जाता है परंतु केतु का वास्तविक स्वरूप इससे कहीं अधिक गहरा है।।यह केवल दूर करने वाला नहीं बल्कि भीतर की ओर मोड़ने वाला ग्रह है।।यह व्यक्ति की चेतना को बाहरी जगत से हटाकर अंदर की गहराइयों में ले जाता है।।केतु का स्वभाव ही पृथकता का है।।जहाँ अन्य ग्रह व्यक्ति को समाज संबंध, उपलब्धि की ओर प्रेरित करते हैं वहीं केतु इन सबके बीच एक अदृश्य दूरी बना देता है।। जब केतु कुंडली के प्रमुख भावों प्रथम चतुर्थ पंचम अष्टम या द्वादश में स्थित होता है तो व्यक्ति का स्वभाव भीतर की ओर झुकने लगता है।।यह अंतर्मुखता केवल किसी भय या कमजोरी का परिणाम नहीं होती बल्कि एक गहन आंतरिक जागरूकता का संकेत भी देती है।।ऐसा व्यक्ति बाहर से शांत संयमित दिखाई देता है।।उसे भीड़ दिखावा और बाहरी आकर्षणों में सहजता नहीं मिलती।।वह अपने अनुभवों को भीतर ही जीता है और अपने विचारों को गहराई में समझने का प्रयास करता है।।यही कारण है कि वह कम बोलता है परंतु जो समझता है वह अत्यंत गहरा होता है।।केतु की यह प्रवृत्ति व्यक्ति को आत्म आकलन की अद्भुत क्षमता प्रदान करती...