मानसिक तनाव,अवसाद आदि के मूल में चंद्र व बुध
आजकल ज्योतिषीय समाधान के लिए मिलने वाले अधिकतर लोगों का प्रश्न मानसिक तनाव,अवसाद, एंजाइटी इत्यादि को लेकर होता हैं। प्रत्यक्ष रूप से कई लोगों का प्रश्न शिक्षा, कैरियर, पारिवारिक क्लेश आदि आदि प्रश्नों के रूप में सामने आता है, अधिकतर लोगों इन प्रश्नों के मूल में भी मानसिक तनाव,अवसाद, एंजाइटी आदि ही निहित होता है, तो आज इन्हीं प्रश्नों का ज्योतिषीय आंकलन करते है.....
मानसिक तनाव हमेशा बाहर की परिस्थितियों से नहीं आता अपितु इसका सीधा संबंध हमारे भीतर के मन और विचारों से होता है।।ज्योतिष में मन का संबंध चंद्र से और सोच विचार का संबंध बुध से माना जाता है।।जब ये दोनों संतुलित रहते हैं तो व्यक्ति शांत और स्पष्ट रहता है लेकिन जब इनमें असंतुलन होता है तो तनाव बढ़ने लगता है।।
चंद्र मन का प्रतिनिधित्व करता है।।यह हमारी भावनाओं संवेदनशीलता और यादों से जुड़ा होता है।।यदि चंद्र कमजोर हो जाए तो व्यक्ति छोटी छोटी बातों को भी दिल से लगाने लगता है।।वह जल्दी दुखी होता है पुरानी बातों को पुनः पुनः याद करता है और भीतर एक हल्की बेचैनी बनी रहती है जिसके कारण यही धीरे धीरे मानसिक तनाव बन जाती है।।
बुध विचारों का कारक है।।यह बताता है कि हम कैसे सोचते हैं और कैसे समझते हैं।।जब बुध असंतुलित होता है तो व्यक्ति बहुत ज्यादा सोचने लगता है।।हर बात को बार बार सोचता है हर चीज को समझने की कोशिश करता है लेकिन जब हर सवाल का जवाब नहीं मिलता है तो मन और ज्यादा उलझ जाता है।।यही अधिक सोच मानसिक थकान और तनाव पैदा करती है।।अतः जब चंद्र और बुध दोनों साथ में प्रभावित होते हैं तो तनाव और बढ़ जाता है।।चंद्र भावनाओं को अस्थिर करता है और बुध विचारों को उलझा देता है।।ऐसे में व्यक्ति ज्यादा महसूस भी करता है और ज्यादा सोचता भी है जिसके कारण वह भीतर से थक जाता है और निराश हो जाता है।।कई बार ऐसा होता है कि कोई पुरानी बात बार बार याद आती है।। यह चंद्र का प्रभाव है और फिर व्यक्ति उसी बात को समझने की कोशिश करता रहता है क्यों हुआ कैसे हुआ और यह बुध का प्रभाव है लेकिन जब न भावना शांत होती है और न ही कोई स्पष्ट उत्तर मिलता है तो मन पर दबाव बढ़ने लगता है।।यह दबाव ही मानसिक तनाव है।।
इससे बाहर निकलने के लिए जरूरी है कि मन और विचार दोनों को संतुलित किया जाए।।चंद्र को शांत करने के लिए खुद को थोड़ा आराम देना शांत माहौल में रहना और अपनी भावनाओं को स्वीकार करना जरूरी है।।वहीं बुध को संतुलित करने के लिए हर बात को ज्यादा न सोचना और कुछ बातों को छोड़ देना सीखना जरूरी है।।
अंत में समझने वाली बात यह है कि जब मन शांत होता है और विचार सरल होते हैं तब तनाव अपने आप कम होने लगता है लेकिन जब मन परेशान हो और विचार उलझे हों तो छोटी सी बात भी भारी लगने लगती है।।इसलिए मानसिक शांति का रास्ता बाहर नहीं भीतर है।।चंद्र को स्थिर रखना और बुध को संतुलित रखना ही वह तरीका है जिससे व्यक्ति धीरे धीरे तनाव से बाहर आ सकता है और भीतर से हल्का महसूस करने लगता है।।
अब सवाल उठता है कि चंद्रमा और बुद्ध को संतुलित कैसे किया जाए, इसके लिए कोई एक निश्चित सिद्धांत संभव नहीं है, चूंकि समाधान के लिए ये जानना जरूरी है कि चंद्र या बुध किस कारण से दूषित है, इन कारणों की व्याख्या के पश्चात ही समाधान संभव है, अर्थात व्यक्ति विशेष की कुंडली स्थित अन्य ग्रहादि योगों का विस्तृत आंकलन के पश्चात ही समाधान पर चर्च किया जा सकता है..
डॉ सुशील कश्यप
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