आपकी कुंडली में ईश्वर ने सबसे बड़ा उपहार कहाँ छिपाया है?
आपकी कुंडली में ईश्वर ने सबसे बड़ा उपहार कहाँ छिपाया है? — जिसे आप आज तक दुर्भाग्य समझते रहे। मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यह नहीं कि उसकी कुंडली में राहु है, शनि है, अष्टम भाव है या द्वादश भाव है। मनुष्य का सबसे बड़ा भ्रम यह है कि वह ईश्वर के उपहार को दुर्भाग्य समझ लेता है। वर्षों तक हजारों कुंडलियों का अध्ययन करने के बाद मेरा अनुभव यही कहता है कि ईश्वर अपनी सबसे बड़ी कृपा कभी भी उस स्थान पर नहीं छिपाते जहाँ मनुष्य सबसे पहले देखता है। यदि ऐसा होता तो हर धनी व्यक्ति ज्ञानी होता, हर सुंदर व्यक्ति संतुष्ट होता, हर राजयोगी शांत होता। लेकिन जीवन ऐसा नहीं है। मैंने ऐसे लोगों को देखा जिनके पास सब कुछ था, फिर भी वे भीतर से रिक्त थे। और ऐसे लोगों को भी देखा जिनकी कुंडली का सबसे कठिन भाव ही अंततः उनकी सबसे बड़ी शक्ति बन गया। तभी समझ आया कि ईश्वर का उपहार सुविधा में नहीं, परिवर्तन में छिपा होता है। जिस भाव से तुम सबसे अधिक भागते हो, संभव है उसी भाव में तुम्हारी आत्मा का सबसे बड़ा जागरण छिपा हो। ज्योतिष हमें केवल यह नहीं बताती कि कौन-सा ग्रह शुभ है और कौन-सा अशुभ। वह यह भी सिखाती है कि जिसे तुम अशुभ ...