भ्रमित और आकस्मिक दो राहु के प्रमुख अस्त्र हैं।।
भ्रमित और त्वरित दो शब्दों में राहु का सारा बल और चरित्र छिपा हुआ है।।
राहु जिस भाव में स्थित होता है जिस भाव से संबंध बनाता है वहां पर अकस्मात परिणाम देता है।।
अतः भ्रमित और आकस्मिक दो राहु के प्रमुख अस्त्र हैं।।
जब भी राहु की दशा,महादशा,अंतर्दशा प्रारंभ हो तो भ्रम से सर्वथा बचने का प्रयास करें और आवेग को अपने जीवन से निकाल दें।।
तीव्रता,अभी,आज ही,बिल्कुल आदि शब्दों का प्रयोग और चिंतन बंद कर दें।।
राहु पर विभिन्न ग्रहों का प्रभाव विभिन्न फल उत्पन्न करता है।।
जिस भाव में राहु स्थित है उस भाव से संबंधित रिश्ते असहज होने लगते हैं।।
प्राप्ति में बाधा और भ्रम का समावेश होने लगता है।।
इसके निदान के लिए शास्त्र ने ही बताया है कि राहु को मंगल कंट्रोल कर लेता है गुरू के समक्ष सरल हो जाता है और बुद्धि के द्वारा इसका परिवर्तन संभव है।।
अतः नित्य व्यायाम करें।। कच्ची जमीन या घास पर पैदल चलें।।
रात्रि में देर से भोजन न करें।।
अच्छी पुस्तकों का अध्ययन करने का नियम बनाए।।
लेखन का नियम अवश्य अपना लें।।
यदि भाग्यवश अच्छे गुरू या आचार्य का सानिध्य प्राप्त हो जाए तो स्वयं का सौभाग्य समझें।।
अच्छे सलाहकार से सलाह लिए बिना कोई कार्य न करें।।
सबसे आवश्यक सलाह
सूर्य अस्त के बाद कोई बड़ा निर्णय न लें क्योंकि रात्रि में राहु का बल बढ़ जाता है।।
नित्य सूर्य के प्रकाश में कुछ देर बैठे,ध्यान करें या पैदल चलें।।
डॉ सुशील कश्यप
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