मांगलिक दोष – अभिशाप या शक्ति?

मांगलिक दोष – अभिशाप या शक्ति?

समाज ने “मांगलिक” शब्द को डर से जोड़ दिया है। कहा जाता है कि मांगलिक व्यक्ति से शादी करने पर जीवनसाथी को खतरा होता है। पर ज्योतिष का गहरा सच इससे अलग है। मांगलिक होना कोई बीमारी नहीं, बल्कि मंगल ग्रह की तीव्र ऊर्जा का शरीर और मन में उतर आना है।

मंगल अग्नि है। वही अग्नि जो लोहे को पिघलाती भी है और तलवार भी बनाती है। मांगलिक व्यक्ति के भीतर यही अग्नि ज्यादा होती है। इसलिए वे सामान्य लोगों से ज्यादा तेज, साहसी, भावुक और क्रियाशील होते हैं। वे जल्दी प्रतिक्रिया करते हैं, जल्दी गुस्सा भी होते हैं और जल्दी प्रेम भी करते हैं। यही कारण है कि उनके रिश्तों में तीव्रता अधिक होती है – चाहे वह लड़ाई हो या आकर्षण।

यह समझना बहुत जरूरी है कि “मांगलिक से मांगलिक की शादी” कोई अंधविश्वास नहीं बल्कि ऊर्जा-संतुलन का सिद्धांत है। अगर एक व्यक्ति में मंगल की ऊर्जा बहुत ज्यादा है और दूसरा बहुत शांत, तो टकराव तय है। मानसिक, शारीरिक और यहां तक कि दांपत्य जीवन में भी असंतुलन बनता है। पर जब दो लोगों की मंगल-ऊर्जा बराबर होती है, तो वही तीव्रता आपसी समझ, आकर्षण और मजबूत रिश्ते में बदल जाती है।

यही कारण है कि ज्योतिष में मांगलिक का सही मेल खोजा जाता है, न कि डर फैलाया जाता है।

अब प्रश्न आता है – क्या मांगलिक होना नुकसान है?
नहीं। सही दिशा मिले तो यही मंगल जीवन का सबसे बड़ा वरदान बनता है।

उच्च या मजबूत मंगल वाले लोग:
 • कठिन हालात में घबराते नहीं
 • नेतृत्व करते हैं
 • जोखिम उठाने से नहीं डरते
 • शारीरिक रूप से ज्यादा मजबूत होते हैं
 • और मानसिक रूप से जुझारू

यही लोग सेना, पुलिस, स्पोर्ट्स, सर्जरी, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और राजनीति में आगे जाते हैं। मंगल जब अपनी दशा या गोचर में सक्रिय होता है, तो व्यक्ति को अचानक ऊंचा पद, नाम और साहसिक निर्णय लेने की शक्ति देता है।

समस्या मंगल में नहीं, उसके असंतुलन में होती है।
अगर मंगल कुंडली में पीड़ित है या बिना मार्गदर्शन के है, तो वही ऊर्जा झगड़ा, हिंसा, दुर्घटना या वैवाहिक तनाव बन जाती है।
और अगर मंगल सशक्त और सही भावों से जुड़ा है, तो वही ऊर्जा सुरक्षा, सफलता और सम्मान बनती है।

इसलिए मांगलिक दोष को अभिशाप कहना आधा सच है।
पूरा सच यह है कि यह एक तेज आग है –
जो खाना भी पका सकती है और घर भी जला सकती है,
सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि उसे संभालना आता है या नहीं।

मांगलिक होना कमजोरी नहीं, जिम्मेदारी है।
जिसने अपनी मंगल-ऊर्जा को समझ लिया,
उसका जीवन साधारण नहीं रहता।

डॉ सुशील कश्यप 

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