शनि: ज्योतिषीय विश्लेषण

ज्योतिष में शनि को अक्सर केवल दुख, देरी और दंड से जोड़ दिया जाता है यह धारणा अधूरी है।।शास्त्रों में शनि डर का नहीं अपितु अनुशासन का पालन करने और करवाने के कारक हैं।।
शनि यह नहीं देखता कि आपने क्या कहा शनि यह देखता है कि आपने जो कहा, उसे निभाया या नहीं इसलिए शनि को कर्म और समय का ग्रह कहा गया है।।जहाँ समय का सम्मान होता है,वहाँ शनि स्वाभाविक रूप से शुभ हो जाता है।।
जिस व्यक्ति में यह गुण होता है कि वह कम बोलता है पर जो बोलता है, उसे निभाता है उसकी कुंडली में शनि कभी पूरी तरह अशुभ नहीं होता।।ज्योतिष की भाषा में समझें तो शनि समय है और समय सीमा है और सीमा का अर्थ है प्रतिबद्धता।जो व्यक्ति समय पर काम करता है और समय का आदर करता है और अपनी बात पर खड़ा रहता हैवह शनि के स्वभाव के अनुसार चलता है।।यह कोई नैतिक उपदेश नहीं है यह शुभ शनि का सीधा संकेत है।।
कुछ लोग बहुत बड़े वादे करते हैं योजनाएँ उनकी  शानदार होती हैं।।बातों में आत्मविश्वास दिखता है पर काम समय पर नहीं होता।।ऐसे लोगों की कुंडली में अक्सर शनि कमजोर मिलता है या तो शनि पीड़ित होता है या बुध बहुत तेज होता है और शनि दबा हुआ क्योंकि ज्योतिष साफ कहता है जो व्यक्ति बार-बार वचन तोड़ता है वह अपने शनि को स्वयं कमजोर करता है।।शनि ऐसा ग्रह है जो कर्म से बिगड़ता भी है और कर्म से सुधरता भी है।।शनि अचानक दंड नहीं देता यह एक बहुत जरूरी बात है कि शनि कभी अचानक प्रहार नहीं करता।।पहले वह संकेत देता है कामों में देरी होने लगती है लोग भरोसा कम करने लगते हैं सहयोग धीरे-धीरे घटता है नाम और विश्वसनीयता कमजोर होती है।।अक्सर यह स्थिति शनि की दशा, अंतरदशा या जन्म शनि पर गोचर के समय आती है यदि व्यक्ति तब भी नहीं सुधरता तो शनि ठोस फल देता है।।जिससे प्रतिष्ठा गिरती है आर्थिक दबाव आता है और संघर्ष बढ़ता है।।यह दंड नहीं है अपितु यह कर्म का न्याय है।।शनि का सबसे बड़ा उपाय है शनि जैसा जीवन।।जो व्यक्ति यह नियम अपना ले जो कहूँगा वही करूँगा और जो नहीं कर सकता उसका वादा नहीं करूँगा उसका शनि धीरे-धीरे शांत होने लगता है।।भले ही जन्म कुंडली में शनि कठिन स्थिति में हो फिर भी वह व्यक्ति गिरता नहीं क्योंकि शनि पूजा के साथ साथ  आचरण से भी प्रसन्न होता है।।क्यों कुछ लोग देर से पर टिकाऊ सफलता पाते हैं आपने अक्सर ऐसा देखा होगाकि कुछ लोग बहुत जल्दी ऊपर जाते हैं और उतनी ही जल्दी गिर जाते हैं।।और कुछ लोग धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं पर टिके रहते हैं।।ज्योतिष में यह शनि का अंतर है क्योंकि शनि दिखावे को नहीं मानता अपितु वह मौन, नियमित और ईमानदार कर्म को मानता है।।जो रोज़ अपना काम करता है बिना शोर किए वह शनि के साथ चलता है।।
शनि सबसे देर से प्रतिक्रिया करता है पर जब करता हैतो उसका प्रभाव लंबे समय तक रहता है।।यदि कोई समय का मज़ाक उड़ाता है वचन को हल्के में लेता है जिम्मेदारी से बचता है तो समझ लेना चाहिए शनि अभी चुप है दशा या गोचर में नहीं आया है।।जब आएगा तो सुधार का नहीं फल का समय होगा।।
यदि जीवन में यह एक नियम आ जाए जो कहा वह निभाया जो निभा नहीं सकता उसका वचन ही नहीं दिया तो शनि कितना भी दुष्प्रभावी हो कष्टों में कमी करेगा।।कमजोर होगा तो संभल जाएगा सामान्य होगा तो शुभ बनेगा और शुभ होगा तो स्थायी सफलता देगा।।क्योंकि शनि डर का ग्रह नहीं है शनि ईमानदारी का ग्रह हैऔर समय के साथ चलने वालों का साथी है।।
शेष सब भगवान शिव के अधीन है।।शनि द्वारा प्रदत्त कष्टों को भगवान शिव की आराधना से कम किया जा सकता है क्योंकि शनि भगवान शिव के अनुचर काल की व्यवस्था का ही दंड अधिकारी है और काल की व्यवस्था का लंघन केवल महाकाल ही कर सकते हैं।।
सबके अंदर विराजमान श्रीभगवान को सादर प्रणाम करता हूं।।

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