राहु की स्थिति,लक्षण

 राहु को केवल छाया-ग्रह कहना पूरा सत्य नहीं है।।राहु वह शक्ति है जो सामान्य जीवन को अलग दिशा दे सकती है परन्तु जब वही शक्ति संतुलन खो देती हैतो व्यक्ति धीरे-धीरे अपने ही भीतर से दूर होने लगता है।।राहु पीड़ित होने का अर्थ यह नहीं कि जीवन समाप्त हो गया।।इसका अर्थ केवल इतना है कि व्यक्ति सच्चाई छोड़कर दिखावे और आभास के पीछे चलने लगा है।।राहु की पीड़ा बाहर कम दिखाई देती है वह पहले भीतर काम करती है घटनाएँ बाद में बिगड़ती हैं पहले सोच और समझ धुंधली होती है।।शास्त्रों के अनुसार राहु तब पीड़ित माना जाता है जब वह गलत भावों में हो अशुभ ग्रहों से युति या दृष्टि संबंध हो गुरु, चंद्र या लग्न को कमजोर कर रहा हो या जब व्यक्ति के कर्मों में छल अति और असंतुलन बढ़ गया हो।।राहु की पीड़ा का पहला असर मन पर पड़ता है।।सब कुछ ठीक होते हुए भी भीतर संतोष नहीं रहता जिसके कारण कल्पनाएँ बढ़ जाती हैं और मन में भ्रम और शंका रहने लगती है।।जिससे अपने फैसलों पर भरोसा कम होने लगता है और एक साथ बहुत कुछ पाने की बेचैनी बनी रहती है।।अक्सर भीतर से यह प्रश्न उठता है सब कुछ होते हुए भी मैं ठीक क्यों नहीं हूँ????
पीड़ित राहु में सच और झूठ का फर्क साफ नहीं रहताझूठ आसान लगता है और सच भारी लगने लगता है जिसके कारण आधा सच भी पूरा सच जैसा लगने लगता है।।यहाँ व्यक्ति जानबूझकर गलत नहीं करता अपितु वह खुद ही भ्रम में पड़ जाता है।।
राहु का असर संबंधों में भी साफ साफ दिखाई देता है।।अचानक आकर्षण होता है  छिपे हुए या असामान्य रिश्ते बनते हैं पुराने संबंध बोझ लगने लगते हैं और भरोसा धीरे-धीरे कम होता जाता है अतः रिश्ते बनते हैं परंतु  टिक नहीं पातेहैं।।
राहु पहचान का भी ग्रह है अतः पीड़ित होने पर व्यक्ति खुद को लेकर उलझन में रहता है जिसके कारण दिखावा बढ़ता जाता है और असली स्वभाव पीछे छूटने लगता है।।
बाहर से जीवन ठीक लगता है पर भीतर का एकाकीपन और खालीपन बढ़ता रहता है।।कामकाज में राहु की पीड़ा अचानक बदलाव लाती है कभी कभी तेज़ उन्नति होती है कभी बिना कारण गिरावट आती है जिससे गलत लोगों पर भरोसा हो जाता है नियमों से टकराव बढ़ता है मेहनत तो होती जाती है किंतु  दिशा साफ और स्पष्ट नहीं रह पाती हैं।।
धन के मामले में भी अस्थिरता आती है राहु अचानक धन देता है और उतनी ही जल्दी छीन भी लेता है।।जोखिम भरे फैसले बढ़ते हैं और दिखावे पर खर्च बढ़ता है धन होते हुए भी मन में डर बना रहता है।।राहु धन को जरूरत और आवश्यकता का साधन नहीं रहने देता वह उसे पहचान और दिखावे का साधन बना देता है।।राहु पलायन का ग्रह है अतः पीड़ित होने पर नशा डिजिटल आदतें अति भोग और सच्चाई से भागने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है जिसके कारण व्यक्ति समस्या से नहीं अनुभूति से भागने लगता है।।राहु का एक सूक्ष्म और खतरनाक रूप होता है झूठा अध्यात्म अतः चमत्कारों के पीछे भागना या जल्दी सिद्धि पाने की चाह अथवा ज्ञान से अधिक दिखावा और धीरे-धीरे यह सब भी अहंकार बन जाता है।।स्वास्थ्य पर राहु का असर धीरे दिखता है नींद की कमी चिंता डर त्वचा या एलर्जी की समस्या मानसिक थकान और बेशक जाँच में कुछ न निकले पर बेचैनी बनी रहती है।।
राहु पीड़ा का सबसे गहरा संकेत है असंतोष अतः जो मिल रहा है वह कभी पर्याप्त नहीं लगता।।यही असंतोष व्यक्ति को बार-बार उसी चक्र में घुमाता रहता है।।अंत में यही समझना आवश्यक है किराहु पीड़ित होना कोई दंड नहीं है अपितु यह एक संकेत है।।संकेत कि जीवन में
सच्चाई संयम और स्थिरता कम हो रही है।।
यदि समय रहते व्यक्ति भ्रम को पहचान ले सच से जुड़ जाएऔर विवेक को महत्व दे तो वही राहुनई सोच देता है,
अलग दृष्टि देता है और भीड़ से अलग पहचान भी देता है।।
राहु गिराने नहीं आता अपितु वह केवल यह देखता है आप भ्रम के पीछे चलते हैंया सच्चाई के साथ खड़े रहते हैं।।

Comments

Popular posts from this blog

अज्ञात भय

वैदिक ज्योतिष और नवम भाव

वीणा योग