चंद्र से चौथे या सप्तम भाव में बुध
जन्म कुंडली में चंद्र से चौथे या सप्तम भाव में बुध स्थित हो तो ऐसे जातक का मस्तिष्क शीशे की तरह कार्य करता है।।
ऐसा जातक दूसरे के के हाव भाव से उसके विचार और उसके निर्णय का आकलन कर लेने में काफी हद तक सक्षम होता है।।
ऐसे जातक वार्ता करते करते दूसरे की भावनाओं को समझ जाते हैं।।
इस योग के कारण जातक को लाभ के साथ साथ कुछ हानि भी प्राप्त होती हैं।।हर योग और ग्रह स्थिति के लाभ और हानि होती ही हैं।।
ऐसे जातक दूसरे के मन और मस्तिष्क को पढ़ते पढ़ते अपनी मौलिकता को खो देते हैं और दूसरे के अनुसार ही चलने लगते हैं।।
दूसरे के प्रतिबिंब बनकर रह जाना ही इस योग का बुरा फल है।।
ऐसे जातक यदि प्रयास करें तो अच्छे सलाहकार होते है।।
ज्यादातर ये जातक मालिक बनने के स्थान पर किसी के सलाहकार बनना पसंद करते हैं।।
विचित्र योग है किन्तु 75% तक स्वयं सिद्ध है।।
शेष 100% सिद्ध जैसा कुछ नहीं होता है क्योंकि 100% सिद्ध सूत्र काल की मर्यादा का उल्लंघन है और किसी को भी काल की मर्यादा के उल्लंघन की आज्ञा नहीं है।।
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