बारहवें भाव में राहु और केतु की स्थिति

ज्योतिष शास्त्र में बारहवें भाव को व्यय और मोक्ष से जुड़ा भाव माना गया है।। खर्च, त्याग, एकांत, नींद, विदेश, अस्पताल, गुप्त कार्य, छिपे शत्रु और मोक्ष की दिशा  ये सभी विषय बारहवें भाव से जुड़े होते हैं इसलिए इस भाव में स्थित ग्रह व्यक्ति के जीवन में चुपचाप लेकिन लगातार प्रभाव डालते हैं।।राहु एक छाया ग्रह है इसका काम भ्रम पैदा करना, इच्छाओं को बढ़ाना और व्यक्ति को सामान्य रास्ते से हटाकर असामान्य दिशा में ले जाना है इसीलिए शास्त्रों में राहु को मायाकारक कहा गया है, क्योंकि यह व्यक्ति को ऐसा दिखाता है जो वास्तविक नहीं होता है राहु न पूरी तरह शुभ है और न पूरी तरह अशुभ यह जैसा संग पाता है, वैसा ही फल देता है।।
जब राहु बारहवें भाव में स्थित होता है, तो व्यक्ति के जीवन में खर्च और इच्छाएँ नियंत्रण से बाहर जा सकती हैं ऐसा जातक बाहर से सामान्य दिखाई देता है, पर भीतर बहुत कुछ छिपा होता है।। बिना कारण खर्च होना, गुप्त योजनाएँ बनना, या ऐसी इच्छाएँ पैदा होना जिनका खुलकर प्रदर्शन नहीं किया जाता और इसी तरह की अनेकों स्थितियाँ बन सकती हैं।।
मानसिक स्तर पर द्वादश भाव का राहु व्यक्ति को अकेलापन पसंद करने वाला बना सकता है अतः ऐसे लोग भीड़ में रहते हुए भी भीतर से अकेले महसूस करते हैं और नींद से जुड़ी परेशानी, बार-बार चिंता करना, मन का भटकना या अनजाना भय बना रहना आदि प्रभाव बार बार प्रभावित करते रहते हैं ।।ये प्रभाव विशेष रूप से तब बढ़ते हैं जब चंद्रमा कमजोर हो या राहु से प्रभावित हो।।

घटनाओं की दृष्टि से बारहवें भाव में राहु अचानक खर्च करवाता है अस्पताल से जुड़ा व्यय, विदेश यात्रा, या किसी छिपे हुए विषय में उलझना संभव है अतः कई बार नुकसान धीरे-धीरे होता है और जातक को तब समझ आता है जब स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी होती है।।
स्वास्थ्य के विषय में यह राहु नींद की कमी, मानसिक थकान, चिंता या नशे की प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है यदि षष्ठ और द्वादश भाव दोनों ही पीड़ित हों, तो रोगों पर खर्च अधिक होता है और उपचार लंबा चलता है ऐसे में व्यक्ति को अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के प्रति सजग रहना चाहिए।।यह समझ लेना कि बारहवें भाव का राहु केवल हानि ही देता है, सही नहीं है यदि बारहवें भाव का स्वामी बलवान हो या गुरु और शुक्र जैसे शुभ ग्रहों का प्रभाव राहु पर हो, तो यही राहु विदेश में अवसर, एकांत में काम करने की क्षमता और आध्यात्मिक झुकाव दे सकता है और  ऐसे जातक विदेश, अस्पताल, शोध, आयात-निर्यात या रहस्यमय विषयों से लाभ कमा सकते हैं।।राहु की महादशा या अंतर्दशा में बारहवें  भाव का राहु विशेष रूप से सक्रिय हो जाता है इस समय खर्च बढ़ सकता है, विदेश से जुड़ी परिस्थितियाँ बन सकती हैं या व्यक्ति भीतर की दुनिया से अधिक जुड़ने लगता है शुभ योग होने पर यह समय आध्यात्मिक प्रगति और विदेश लाभ देता है, अन्यथा भ्रम और मानसिक बेचैनी बढ़ा सकता है और अवसाद तक की स्थिति उत्पन्न होती देखी जाती है।।

अंत में यही कहा जा सकता है कि बारहवें भाव में स्थित राहु का फल पूरी कुंडली पर निर्भर करता है अतः कमजोर स्थिति में यह व्यय और मानसिक उलझन देता है, जबकि शुभ समर्थन मिलने पर यही राहु व्यक्ति को गहराई, एकांत और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ाता है बारहवें  भाव का राहु दिखता कम है, पर जीवन पर इसका प्रभाव बहुत गहरा होता है।।शुभ स्थिति में स्थित राहु जीवन को विदेश तक ले जाने की क्षमता रखता है और अशुभ स्थिति में जेल,हॉस्पिटल के चक्कर लगवा सकता है कभी कभार पागल तक भी कर सकता है।।

डॉ सुशील कश्यप 

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