पंचम भाव के अनकहे रहस्य
पंचम भाव पर जब बात आती है तो ये कर्मों का बैंक बैलेंस है। संचित कर्म इस भाव से ही देखते है। जीवन में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर इस भाव से विचार होता है । जैसे विद्या , संतान,बुद्धि , ईष्ट आदि । यह भाव प्रेम का भी है ,आनंद का भी है। जैसे पंचम भाव में बैठे ग्रह से आप को हल्का अंदाजा लग सकता है कि इस जातक के किस प्रकार का टेस्ट होगा फिल्म ,सीरियल , आदि देखने में । जैसे पंचम का मंगल एक्शन थिल्रर मूवी का शौक दे सकता है ,शनि मिस्ट्री थ्रिलर , राहु जासूसी आदि। पंचम का दूषित राहु माता के दांत खराब कर सकता है वहीं केतु झुरिया या कम बाल। जितने भी ईष्ट देवता के निर्णय हेतु सूत्र दिए है उसमें 90% सारे सूत्र पंचम भाव पर लिखे गए है।जैसे पंचम का सूर्य 97% शिव भक्त मिलेगा , पंचम शनि में मंगल ,राहु आदि का प्रभाव दे तो कई बार माता काली की भक्ति में भी रुझान आता है उसे महिषासुर मर्दिनी, कालभैरव अष्टकम ऐसे स्तोत्र पसंद आयेंगे। पंचम का मंगल , या सूर्य इनका सम्मिलित प्रभाव कई बारी भगवान राम के प्रति आसक्ति देता है। खैर ईष्ट देवता चयन हेतु विस्तृत लेख पूर्व में लिखा जा चुका है इच्छुक गण उसको ढूंढ कर पढ़ सकते है। यह भाव षष्ठ से द्वादश है ऐसे में कर्ज मुक्ति ,शत्रु मुक्ति , रोग मुक्ति के लिए पंचमेश की दशा जरूरी है ,पंचमेश अगर केंद्र त्रिकोण में हो ओर 2,11,9 आदि शुभ भावों से संबंधी हो तो पंचमेश की दशा जातक के कर्ज उतारने में मदद करती है । 10 में से 8 व्यक्तियों को पूछिएगा जिनका चंद्र पंचम हो उनका प्रेम में बहुत गंदा अनुभव होता है। केतु तो पंचम में प्रेम के लिए सबके घातक है। मैने पंचम भाव पर बहुत से विचित्र सूत्र देखे जैसे पंचमेश तृतीयेश का संबंध हो ,पंचमेश तीन में तृतीयेश पंचम में हो तो लेखन , कला, गायन,एक्टिंग , कलाकारी, शायरी बनाना ,कहानी लिखना , बहुत अच्छा गेम खेलना ऐसा टैलेंट हो सकता है । शास्त्रों में अष्टम को दूषित बताया है परन्तु पंचमेश अष्टम में हो या अष्टमेश पंचम में हो ओर गुरु बुध ठीक हो तो जातक गजब का बुद्धिमान होता है । ऐस ही द्वादश को गंदा मानते है मैने देखा द्वादश , तृतीय,पंचम ,अष्टम इनका सबका दिमाग ,चेतन ,अवचेतन मन , ओर पूर्वाभास की गहरी शक्ति इन भावों में छिपी है जब पंचम का सम्बन्ध द्वादश से हो जैसे पंचमेश द्वादश में या द्वादशेष पंचम में तो उस जातक के स्वप्न से उसको भविष्य में होने वाली घटनाएं दिखेंगी । यह सब मेरे अनुभव है ।ये पंचम का 3,8,12 भाव से संबंधी गजब की पूर्वाभास शक्ति भी देते है। इनसे पूछे ये बताएंगे हमारी अंदर की आवाज पहले चेता देती है। पंचमेश अगर दशम में हो या दशमेश पंचम में ओर कर्मकारक शनि ठीक हो,तो निश्चित जीवन में आपके देश काल परिस्थितियों अनुसार आपको बहुत अच्छे स्थान पर पहुंचाने में मदद करेगा। परन्तु मैने देखा है पंचमेश की दशा अंतर्दशा करियर में बदलाव लाती है । हमने एक बहुत पहले पोस्ट लिखी थी कि पंचम भाव से राम नाम लिखना भी देखते है। इसलिए जैसे भी ग्रह पंचम में बैठे है और उनकी दशा चल रही है तो आप क्या करे कि उस ग्रह के देवता के नाम कॉपी में लिखा करें । पंचम के राहु या शनि व्यवहारिक,पैसा कमाने वाली बुद्धि देते है । पंचम में मंगल ,राहु , सूर्य ऐसे क्रूर ग्रह हमेशा जातक को तर्कशील बनाते है वह प्रश्न काफी करेगा , आसानी से किसी पर लट्टू नहीं होगा। पंचम का सम्बन्ध षष्ठ भाव से बच्चों के सेहत के लिए खास नहीं होता। होरा शास्त्र के ग्रंथों में पंचम भाव को दूरदर्शिता का स्थान बोला है । व्यक्ति भविष्य के प्रति कितनी अच्छी तैयारी कर सकता है , वह कितना visionary है वह पंचम से देखिए। पूर्व के समय में पंचम से योजना बनाना देखते है,इसलिए जिस जातक का पंचमेश ,गुरु उत्तम हो वह बहुत ही सिस्टेमेटिक प्लानिंग करता है । जैसे पंचम का राहु किसी यात्रा , किसी भी चीज का प्लान बनाएगा तो बैकअप और डबल बैकअप प्लान बनाएगा । शनि कहेगा चलते चलो योजना बनते चलेगी। इस स्थान को मंत्र जाप कहा है इसलिए पंचमेश लग्न में, दूसरे में ,पंचम में,नवम में होने से मंत्र सिद्धि हेतु के लिए सिद्धि प्रदाता स्थिति बनाता है।शुक्र मायावी ,इंद्रजाल आदि का कारक है पंचम में होने से भविष्य में जब भी उसको आर्थिक संकट आना हो उसको पहले आभास हो जाएगा ,पंचम का शुक्र कभी प्रेम में रहा हो तो बहुत अच्छी यादें देता है। पंचम का सम्बन्ध जब द्वादश से या तृतीय से हो उस जातक को मानसिक दिक्कतें हो तो उसे मेडिटेशन करने को कहें वह जरूर बदलाव देखेगा। पंचम भाव आजकल शेयर मार्केट का हो गया है । तृतीय भाव से इंट्राडे आदि देखते है ,दूसरे स्थान से बॉन्ड्स, द्वादश से फॉरेक्स ,अष्टम से म्यूचुअल फंड और sip वगैरह । पंचमेश का दूसरे ,एकादश भाव में बैठना या उन भाव का इस भाव में आना साथ ही अष्टम का रोल बहुत अधिक है यही अचानक से धनी बनाता है । तीसरा भाव शेयर मार्केट वाले का खराब हो तो मार्केट की समझ नहीं होगी ,खरीदने बेचने में असमंजस्य में पड़ जाएगा । जब भी तृतीयेश के ऊपर राहु का गोचर हो या तृतीयेश खराब भाव से गोचर कर रहा हो तो शेयर मार्केट में ध्यान रखना चाहिए अधिकांश नुकसान होगा । चंद्र,बुध , राहु इसके लिए महत्वपूर्ण ग्रह है । पंचमेश अष्टम में या एकादशेश अष्टम में long term investment से लाभ होगा। पंचम नवम से नवम है तो मंदिर पूजा का स्थान भी है। एक व्यक्ति के पंचम में केतु चंद्र है वह फोन करके पूछते है मुझे ननिहाल के मंदिर स्वप्न में आते है । अब कौन बताएं पंचम ईष्ट आदि का है ,वहां नाना का कारक ओर माता का कारक केतु है इस कारण ऐसा हो रहा है । ऐस में पंचम में केतु या चंद्र होने से ननिहाल तरफ जो मंदिर हो जो देवता हो जिन्हें वह पूजते हो वहां जाते रहना चाहिए। पंचम में मंगल होने से अपने ग्राम देवता ,स्थान देवता यानि कोई पैतृक मंदिर पूर्वजों द्वारा बसाया हुआ जाना चाहिए। एक अंतिम सूत्र बताता हूं पंचमेश जिस किस भाव में जाए उस भाव के फल पाने की आकांक्षा हो तो मंत्र साधना करे फूल खिल उठेगा ।।
डॉ सुशील कश्यप
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