राहु और मंगल की युति

ज्योतिष में कुछ ग्रह युतियाँ ऐसी होती हैं जो व्यक्ति को बहुत ऊर्जा देती हैं, लेकिन उसी ऊर्जा को संभालने का संतुलन नहीं दे पातीं।। राहु और मंगल की युति को इसी श्रेणी में रखा जाता है।। इस युति में शक्ति तो बहुत ज्यादा होती है पर दिशा और ठहराव का अभाव रहता है।।मंगल ग्रह स्वभाव से तेज़ी, साहस, जोखिम उठाने और तुरंत निर्णय लेने का कारक है अतः यह व्यक्ति को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और बिना डर काम करने की शक्ति देता है।। वहीं राहु अधीरता अतृप्त इच्छा शॉर्टकट अपनाने और पूरी प्रक्रिया समझे बिना आगे बढ़ने की प्रवृत्ति का प्रतिनिधित्व करता है।। जब मंगल की गति और राहु की अतृप्ति एक साथ मिलती है, तो व्यक्ति सोचने से पहले करने लगता है।।ऐसे जातक निर्णय लेने से पहले अधिक विचार नहीं करते।। उन्हें लगता है कि सोच-विचार समय की बर्बादी है और काम पहले हो जाना चाहिए।। पहले कर लेते हैं बाद में सुधार लेंगे जैसी मानसिकता बन जाती है।। इसका परिणाम यह होता है कि योजना अधूरी रहती है, जोखिम का सही आकलन नहीं हो पाता और काम बीच में अटक जाते हैं या बिगड़ जाते हैं।। यहाँ समस्या योग्यता या क्षमता की नहीं बल्कि जल्दबाज़ी की होती है।।यह युति व्यक्ति को बार-बार प्रयास करने की ताकत तो देती है, लेकिन बार-बार वही गलती भी दोहरवाती है।। हर बार वही तरीका अपनाया जाता है पहले काम, बाद में सोच और इससे धीरे-धीरे व्यक्ति में झुंझलाहट बढ़ती है, दूसरों से बहस होने लगती है और वह स्वयं को अभागा और दुर्भाग्यशाली मानने लगता है जबकि वास्तविक कारण उसका काम करने का तरीका होता है।।
राहुमंगल युति के प्रभाव से मन जल्दी शांत नहीं होता।।उसे  हर काम में जल्दी चाहिए होती है और प्रतीक्षा करना कठिन लगने लगता है।। ऐसे लोग बात पूरी सुने बिना जवाब दे देते हैं गुस्से में बोल जाते हैं और अनजाने में रिश्तों में टकराव पैदा कर लेते हैं।। यह सब जानबूझकर नहीं बल्कि भीतर की अधीरता के कारण होता है।।
यह युति पूरी तरह नकारात्मक भी नहीं है अतः यदि व्यक्ति अपने जीवन में अनुशासन लाए निर्णय से पहले थोड़ा ठहरना सीखे और योजना बनाकर कार्य करे तो यही युति असाधारण साहस जोखिम लेने की क्षमता और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने की शक्ति देती है।। तब यह कमजोरी नहीं, बल्कि बड़ी ताकत बन जाती है अतः समस्या ग्रहों में नहीं उन्हें संभालने के तरीके में होती है।।
राहु मंगल युति में ज्योतिषीय उपाय पूजा पाठ दान के साथ साथ  व्यवहार और वृति सुधार पर आधारित होते हैं।। मंगल के लिए नियमित शारीरिक श्रम व्यायाम और अनुशासन आवश्यक है और राहु के लिए स्पष्ट लक्ष्य समय सारिणी और शॉर्टकट से बचने की आदत जरूरी होती है।। निर्णय लेने से पहले कम से कम एक दिन रुककर सोचना और बोलने से पहले सामने वाले की बात पूरी सुनने की आदत इस युति को संतुलित करती है।। ये उपाय ग्रहों को नहीं व्यक्ति को संतुलन में लाते हैं।।अंततः राहु मंगल युति व्यक्ति को कमजोर नहीं बनाती, बल्कि उसे अत्यधिक जल्दबाज़ बना देती है।। जब यह जल्दबाज़ी नियंत्रण में आ जाती है, तो वही व्यक्ति तेज़ निर्णय लेने वाला साहसी और प्रभावशाली सिद्ध होता है अतः समस्या यह नहीं कि व्यक्ति जल्दी करता है, समस्या यह है कि वह रुकना नहीं जानता और जब रुकना सीख लिया जाता है तो यही युति सफलता का कारण भी बन जाती है।।

Comments

Popular posts from this blog

अज्ञात भय

वैदिक ज्योतिष और नवम भाव

वीणा योग