कुंडली का सबसे भयावह योग – शनि और राहु की युति (विष दोष)
कुंडली का सबसे भयावह योग – शनि और राहु की युति (विष दोष)
कुंडली में जब शनि और राहु एक साथ बैठ जाते हैं, तो जातक को ऐसा महसूस होता है जैसे जीवन की कमर ही टूट गई हो।
इस युति से बनने वाले योग को ज्योतिष में विष दोष कहा जाता है।
यह दोष केवल धन, नौकरी या व्यवसाय तक सीमित नहीं रहता।
यह धीरे-धीरे मन की शांति, आत्मविश्वास और रिश्तों को भी प्रभावित करता है।
बिना कारण डर और घबराहट
लगातार नकारात्मक सोच
मेहनत के बाद भी सफलता न मिलना
अपमान, धोखा और अकेलापन
कमर, पैर, नसों और त्वचा से जुड़ी परेशानियाँ
परिवार और समाज से दूरी
शनि कर्मों का हिसाब लेते हैं और राहु भ्रम पैदा करता है।
जब ये दोनों मिलते हैं, तो इंसान अपने ही कर्मों और डर के चक्र में फँस जाता है।
शनि–राहु दोष का सबसे प्रभावी उपाय
शनि अनाथों और उपेक्षित लोगों के ग्रह माने जाते हैं।
इसीलिए अनाथालय में सेवा या दान करना सबसे बड़ा और सच्चा उपाय माना गया है।
शनिवार के दिन अनाथ बच्चों को भोजन, कपड़े या पढ़ाई की सामग्री देने से
शनि का भारी दोष धीरे-धीरे शांत होने लगता है।
घर का टॉयलेट राहु का स्थान माना गया है और नीला रंग शनि का।
शनिवार को टॉयलेट को नीले रंग के हार्पिक या किसी भी नीली सफाई सामग्री से साफ करने से
राहु और शनि दोनों के दोषों में राहत मिलती है।
शनिवार को मंदिर में स्थित शिवलिंग की साफ-सफाई करना
सफाई कर्मचारियों को दान देना
और किसी मेहनतकश व्यक्ति का अपमान न करना
ये सभी उपाय बहुत छोटे हैं, लेकिन प्रभाव बहुत गहरा होता है।
राहु की युति से सकारात्मक परिणाम भी मिलते हैं
यह युति व्यक्ति को गहरी सोच देती है
रिसर्च, रहस्य विद्या और ज्योतिष की ओर ले जाती है
कठिन परिस्थितियों में टिके रहने की ताकत देती है
दूसरों के दर्द को समझने की दृष्टि देती है
ऐसे लोग देर से सफल होते हैं,
लेकिन जब सफल होते हैं, तो बहुत मज़बूती से खड़े होते हैं।
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