ज्योतिष शास्त्र v चंद्रमा
ज्योतिष शास्त्र अनुसार प्रत्येक ग्रह मनुष्य के जीवन में किसी न किसी प्रकार का प्रभाव डालता है, परंतु उन सभी प्रभावों को ग्रहण करने सहने और दिशा देने की शक्ति चंद्रमा में ही होती है।।राहु भ्रम उत्पन्न करता है शनि जीवन में दबाव और कठिनाइयाँ देता है मंगल क्रोध और आवेग पैदा करता है किंतु इन सबको मनुष्य किस सीमा तक स्वीकार करता है उनसे कैसे निपटता है और उनका परिणाम क्या होगा यह पूर्ण रूप से चंद्रमा पर निर्भर करता है।।चंद्रमा को मन का कारक कहा गया है और मन ही वह केंद्र है जहाँ भ्रम जन्म लेता है, दबाव महसूस होता है और क्रोध प्रतिक्रिया बनकर बाहर आता है अतः यदि मन स्थिर है तो बड़ा से बड़ा भ्रम भी स्पष्टता में बदल सकता है भारी दबाव भी साधना बन सकता है और तीव्र क्रोध भी संयम में परिवर्तित हो सकता है और यह स्थिरता और ग्रहणशीलता चंद्रमा की शक्ति से ही आती है।।राहु व्यक्ति को माया, भ्रम, भय और असमंजस में डालता है अतः जब चंद्रमा कमजोर होता है, तब व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में उलझ जाता है भ्रम को ही सत्य मान लेता है और मानसिक अशांति में फँस जाता है वहीं मजबूत चंद्रमा वाला व्यक्ति राहु के भ्रम को पहचान लेता है, वह भ्रमित तो होता है, पर बहता नहीं है।।शनि जीवन में जिम्मेदारियाँ, संघर्ष, देरी और मानसिक दबाव देता है कमजोर चंद्रमा वाले व्यक्ति के लिए शनि का दबाव अवसाद, निराशा और आत्महीनता बन जाता है परंतु यदि चंद्रमा सशक्त हो तो वही दबाव अनुशासन धैर्य और आत्मबल में बदल जाता है अतः ऐसा व्यक्ति शनि की परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि निर्माण की प्रक्रिया मानता है।।मंगल क्रोध, साहस और ऊर्जा का ग्रह है।।मंगल की ऊर्जा यदि चंद्रमा द्वारा संतुलित न हो तो क्रोध हिंसा, झगड़े और विनाश का कारण बनता है परंतु जब चंद्रमा मजबूत होता है तब मंगल का क्रोध साहस आत्मरक्षा और सकारात्मक कर्मशक्ति में परिवर्तित हो जाता है अर्थात क्रोध को दिशा देने का कार्य भी चंद्रमा ही करता है।।इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि ग्रह परिस्थितियाँ देते हैं परंतु प्रतिक्रिया चंद्रमा तय करता है।।इसीलिए एक ही परिस्थिति में कोई व्यक्ति टूट जाता है और कोई व्यक्ति निखर जाता है इसका कारण बाहरी ग्रह नहीं बल्कि आंतरिक मन की शक्ति होती है और मन की शक्ति का स्वामी चंद्रमा है।।इसी कारण ज्योतिष में कहा गया है कि यदि चंद्रमा ठीक है तो व्यक्ति जीवन की किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है और राहु का भ्रम शनि का दबाव और मंगल का क्रोध तब व्यक्ति को तोड़ते नहीं बल्कि उस को और शक्तिशाली बनाते हैं।।अतः चंद्रमा केवल एक ग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य की सहनशक्ति और संतुलन का आधार है इसीलिए चंद्रमा को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है क्योंकि वही यह तय करता है कि जीवन की कठिन शक्तियाँ हमें कमजोर करेंगी या मजबूत बनाएँगी।।
जितना जान पाया उतना बता दिया है अब जो नहीं जान पाया उसको बताना संभव ही नहीं है।।
शेष सब भगवान शिव के अधीन हैं क्योंकि आदि से अंत तक अंत से अनंत तक सब शिव हैं।।
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