छठे भाव में मंगल राहु की युति
जन्म कुंडली के छठे भाव में राहु अथवा सूर्य स्थित हो तो ऐसा जातक किसी का दबाव और प्रभाव नहीं मानता है और न ही किसी के प्रभाव से प्रभावित होता है।।
मंगल देव स्थित हो तो यह स्थिति और भी ज्यादा वृहत रूप से फलित होती है।।मंगल देवता के स्थित होने पर ऐसे जातक को प्रभावित करना सामने वाले के भाग्य में कमी और कष्टों में वृद्धि भी कर देता है।।
ऐसा जातक शत्रुहंता होता है अर्थात उसकी हानि की इच्छा रखने वाला स्वयं हानि उठाता है।।
सूत्र स्वतः पूर्ण सिद्ध है और 100 % फलित होता है बस चलित में स्थान परिवर्तित नहीं होना चाहिए।।
डॉ सुशील कश्यप
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