कुंडली में अष्टकवर्ग

आज हम चर्चा करेंगे कुंडली में अष्टकवर्ग की
अष्टकवर्ग एक ऐसा प्वाइंट सिस्टम है जिसमें हर ग्रह अलग-अलग भावों को अंक देता है।
इन अंकों को देखकर हम समझते हैं कि जीवन के किस क्षेत्र में ग्रह सहयोग कर रहा है और कहाँ थोड़ा संघर्ष करवाएगा।

सरल शब्दों में ,
अष्टकवर्ग बताता है कि किस घर में “ऊर्जा” ज्यादा है और किस घर में कम।
अष्टकवर्ग में 7 ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि) और लग्न — मिलकर हर भाव को अंक देते हैं।
हर ग्रह किसी भाव को 0 या 1 अंक देता है।
एक ग्रह अधिकतम 8 अंक तक दे सकता है (भिन्नाष्टकवर्ग में)।
जब किसी एक भाव में सभी ग्रहों के अंक जोड़ दिए जाते हैं, तो उसे सर्वाष्टकवर्ग कहते हैं।
आमतौर पर:
• 25 से कम अंक – कमजोर क्षेत्र
• 25 से 30 – सामान्य
• 30 से ऊपर – मजबूत
• 35 से ऊपर – बहुत अच्छा
अब समझते हैं 12 भावों में अंक क्या बताते हैं।

1 भाव (लग्न)
स्वास्थ्य, व्यक्तित्व, आत्मबल
• अंक ज्यादा – अच्छा स्वास्थ्य, आत्मविश्वास
• अंक कम – स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव, निर्णय में अस्थिरता
2 भाव
धन, वाणी, परिवार
• अंक ज्यादा – धन संचय में स्थिरता
• अंक कम – पैसों में रुकावट, पारिवारिक मतभेद
3 भाव
हिम्मत, प्रयास, छोटे भाई
• अंक ज्यादा – साहस और जोखिम लेने की क्षमता
• अंक कम – प्रयास में ढीलापन
4 भाव
घर, माता, वाहन, सुख
• अंक ज्यादा – घर-गृहस्थी का सुख
• अंक कम – मानसिक अशांति या संपत्ति विवाद
5 भाव
संतान, बुद्धि, शिक्षा
• अंक ज्यादा – शिक्षा और निर्णय क्षमता मजबूत
• अंक कम – पढ़ाई या संतान से जुड़ी चिंता
6 भाव
रोग, ऋण, शत्रु
यहाँ उल्टा नियम काम करता है।
• अंक ज्यादा – शत्रुओं पर विजय
• अंक कम – रोग या कर्ज की परेशानी
7 भाव
विवाह, साझेदारी
• अंक ज्यादा – वैवाहिक स्थिरता
• अंक कम – संबंधों में तनाव
8 भाव
आयु, अचानक घटनाएँ
• अंक ज्यादा – संकट से निकलने की क्षमता
• अंक कम – जीवन में अचानक झटके
9 भाव
भाग्य, धर्म, पिता
• अंक ज्यादा – भाग्य का साथ
• अंक कम – मेहनत ज्यादा करनी पड़ती है
10 भाव
कर्म, करियर, समाज में स्थान
• अंक ज्यादा – करियर ग्रोथ और पहचान
• अंक कम – नौकरी में अस्थिरता
11 भाव
लाभ, आय, मित्र
• अंक ज्यादा – आय के अवसर
• अंक कम – लाभ में रुकावट
12 भाव
खर्च, विदेश, हानि
• अंक ज्यादा – खर्च ज्यादा, लेकिन विदेश लाभ संभव
• अंक कम – खर्च नियंत्रित

अष्टकवर्ग गोचर में भी बहुत काम आता है।
जब कोई ग्रह ऐसे भाव से गुजरता है जहाँ उसके अंक ज्यादा हों, तो उसका परिणाम बेहतर मिलता है।

डॉ सुशील कश्यप 

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