शक्ति, साहस और पराक्रम का कारक मंगल

जिस ग्रह का नाम *मंगल* हो… वो अमंगल कैसे कर सकता है?

क्या आपने कभी सोचा है कि जिसे शास्त्रों में शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक माना गया है, उसी मंगल ग्रह को आज डर और अशुभता का पर्याय क्यों बना दिया गया है? 

सच ये है कि मंगल दोष को जितना डरावना बताया गया है, वह उतना है नहीं… बल्कि यह एक अधूरी समझ और अतिरंजित भय का परिणाम है।

वास्तव में मंगल कोई विनाशकारी शक्ति नहीं, बल्कि पराक्रम, साहस और आत्मविश्वास का स्रोत, 
नेतृत्व और निर्णय क्षमता का कारक, युद्ध में विजय दिलाने वाला ऊर्जा केंद्र है..  

शास्त्रों में मंगल को भूमि पुत्र कहा गया है — यानी स्थिरता, शक्ति और धरातल से जुड़े रहने की ऊर्जा।
फिर मांगलिक दोष का डर क्यों?
असल में, जब मंगल की ऊर्जा असंतुलित होती है, तब व्यक्ति में—
गुस्सा बढ़ सकता है, जल्दबाजी के फैसले हो सकते हैं... 
लेकिन ध्यान रहे— यह दोष नहीं, ऊर्जा का गलत दिशा में प्रयोग है!

सही मार्गदर्शन, संतुलन और समझ से यही मंगल—आपको जीवन में अपार सफलता दे सकता है,  मजबूत व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता बना सकता है... 
इसलिए अब समय है डर छोड़ने का… और समझने का कि—मंगल अशुभ नहीं, बल्कि सही उपयोग में सबसे बड़ा शुभ ग्रह है!

डॉ सुशील कश्यप 

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