बुध और आपके रिश्ते — शब्दों से बनता भाग्य, शब्दों से टूटता संसार
बुध और आपके रिश्ते — शब्दों से बनता भाग्य, शब्दों से टूटता संसार
लोग सोचते हैं कि रिश्ते प्रेम से चलते हैं। कोई कहता है सम्मान से, कोई विश्वास से, कोई त्याग से। परंतु यदि ज्योतिष के सबसे गहरे रहस्य में उतरें तो एक ग्रह ऐसा है जिसके बिना कोई भी रिश्ता अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता, और वह है बुध। क्योंकि जहाँ वाणी समाप्त होती है, वहाँ दूरी प्रारम्भ होती है। जहाँ संवाद मर जाता है, वहाँ प्रेम भी धीरे-धीरे अपनी अंतिम साँसें लेने लगता है। इसलिए बुध केवल बुद्धि का ग्रह नहीं है, बुध दो आत्माओं के बीच बहने वाली उस अदृश्य नदी का नाम है जिसे संवाद कहते हैं।
महर्षि पराशर ने बुध को वाक्, बुद्धि, तर्क, गणना और व्यवहार का कारक कहा। परन्तु मेरा अनुभव कहता है कि बुध इन सबसे भी आगे है। बुध वह ग्रह है जो यह तय करता है कि आपके शब्द सामने वाले के हृदय तक पहुँचेंगे या केवल उसके कानों तक। यही कारण है कि दो लोग एक ही बात कहते हैं, पर एक के शब्द संबंध जोड़ देते हैं और दूसरे के शब्द वर्षों पुराने रिश्ते तोड़ देते हैं।
याद रखिए, शुक्र प्रेम देता है, चंद्रमा भावना देता है, पर बुध उन दोनों के बीच पुल बनाता है। यदि बुध टूट गया, तो प्रेम भी मन तक पहुँच नहीं पाता। कितने ही पति-पत्नी एक-दूसरे से प्रेम करते हैं, फिर भी अलग हो जाते हैं। कारण प्रेम की कमी नहीं होती, कारण यह होता है कि दोनों की भाषा अलग हो चुकी होती है। बुध मौन नहीं सहता। बुध चाहता है कि मन में जो है, वह सम्मानपूर्वक शब्द बनकर बाहर आए।
अब कुंडली की ओर आइए। यदि बुध राहु से जुड़ जाए तो व्यक्ति शब्दों से भ्रम पैदा कर सकता है या स्वयं भ्रमित हो सकता है। यदि बुध केतु से जुड़ जाए तो भीतर ज्ञान बहुत होता है, पर उसे व्यक्त करने में कठिनाई आ सकती है। यदि बुध पर शनि की कठोर दृष्टि हो तो व्यक्ति बोलने से पहले सौ बार सोचता है, पर कई बार अपनी भावनाएँ व्यक्त ही नहीं कर पाता। यदि मंगल बुध को प्रभावित करे तो वाणी तीखी हो जाती है; सत्य भी तलवार की तरह चुभने लगता है। यदि गुरु बुध को देखे तो शब्दों में मर्यादा, ज्ञान और करुणा आ जाती है। और यदि शुक्र बुध के साथ हो तो वाणी केवल सुंदर नहीं होती, हृदय को छूने वाली बन जाती है।
अब भाव अपनी कथा कहते हैं। यदि बुध प्रथम भाव में है तो आपका व्यक्तित्व आपकी वाणी से पहचाना जाएगा। द्वितीय में है तो आपकी बोली ही आपका भाग्य बनेगी। तृतीय में है तो लेखन, वक्तृत्व और संचार आपकी शक्ति होंगे। चतुर्थ में है तो घर का वातावरण शब्दों से बनेगा या बिगड़ेगा। पंचम में है तो आपकी बुद्धि प्रेम को दिशा देगी। षष्ठ में है तो शब्द शत्रु भी बना सकते हैं और विवाद भी समाप्त कर सकते हैं। सप्तम में है तो विवाह संवाद पर टिकेगा। अष्टम में है तो रहस्य, शोध और गूढ़ ज्ञान आपकी वाणी में उतरेंगे। नवम में है तो शब्द उपदेश नहीं, प्रेरणा बनेंगे। दशम में है तो करियर आपकी संचार क्षमता से ऊँचा उठेगा। एकादश में है तो मित्र और नेटवर्क आपकी वाणी से बनेंगे। द्वादश में है तो मौन भी आपकी भाषा बन सकता है।
राशियाँ भी बुध की दिशा बदल देती हैं। मिथुन में बुध प्रश्न पूछता है, कन्या में विश्लेषण करता है, तुला में संतुलन खोजता है, वृश्चिक में छिपे हुए सत्य निकालता है, धनु में दर्शन बोलता है, मीन में तर्क भावना में घुल जाता है। इसलिए बुध केवल यह नहीं बताता कि आप कैसे बोलते हैं; वह यह भी बताता है कि आप सत्य को किस दृष्टि से देखते हैं।
और फिर आते हैं नक्षत्र। अश्लेषा का बुध शब्दों से बाँध भी सकता है और मुक्त भी कर सकता है। हस्त का बुध हाथ और वाणी दोनों से सृजन करता है। ज्येष्ठा का बुध प्रभावशाली होता है, पर अहंकार से बचना पड़ता है। रेवती का बुध करुणा से भरा होता है। प्रत्येक नक्षत्र बुध को अलग स्वर देता है। यही कारण है कि दो महान वक्ताओं की शैली कभी एक जैसी नहीं होती।
अब सबसे बड़ा रहस्य सुनिए। बुध केवल आपकी वाणी नहीं है, बुध आपकी सुनने की क्षमता भी है। संसार में अधिकांश रिश्ते इसलिए नहीं टूटते कि लोग गलत बोलते हैं; वे इसलिए टूटते हैं क्योंकि लोग सुनना बंद कर देते हैं। जिस दिन आपने सुनना छोड़ दिया, उसी दिन आपका बुध कमजोर होना प्रारम्भ हो गया।
और अंत में एक सूत्र अपने जीवन में लिख लीजिए—बुद्धिमान होना बड़ी बात नहीं है, बुधवान होना बड़ी बात है। बुद्धिमान व्यक्ति हर बहस जीत सकता है, पर बुधवान व्यक्ति हर रिश्ता बचा सकता है। बुद्धिमान तर्क देता है, बुधवान समाधान देता है। बुद्धिमान सामने वाले को पराजित करता है, बुधवान सामने वाले के हृदय में स्थान बना लेता है।
इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपकी कुंडली का बुध आपको आशीर्वाद दे, तो केवल मंत्र मत जपिए। अपनी वाणी को तपाइए। बोलने से पहले सोचिए—क्या मेरे शब्द सामने वाले के मन में प्रकाश भरेंगे या अंधकार? क्योंकि बुध का सबसे बड़ा रहस्य यही है—भाग्य हाथों की रेखाओं से कम, शब्दों की दिशा से अधिक बनता है। जो अपनी वाणी को जीत लेता है, वह आधा जीवन जीत लेता है। और जो अपनी वाणी से किसी टूटे हुए हृदय को जोड़ देता है, वही वास्तव में बुध का प्रिय बन जाता है।
डॉ सुशील कश्यप
Comments
Post a Comment